बलोचिस्तान में पाकिस्तान की सेना के काफिले पर हमला कर छह जवान मारे : बीएलएफ का दावा

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क्वेटा (बलोचिस्तान)। बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) के प्रवक्ता मेजर घोरम बलोच ने दावा किया है कि नौ जनवरी को पाकिस्तान की सेना के काफिले पर फ्रंट के हमले में छह जवान मारे गए। प्रवक्ता ने मीडिया को भेजे बयान में कहा कि फ्रंट के लड़ाकों ने दोपहर करीब एक बजे सेंट्रल हाइवे पर ओरनाच क्रॉस पर सेना के काफिले पर घात लगाकर हमला किया।

द बलोचिस्तान पोस्ट के अनुसार, प्रवक्ता ने कहा कि सैन्य काफिले के एक वाहन पर भीषण हमला हुआ। इस वाहन में सवार छह जवान मौके पर ही मारे गए। सैन्य वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मेजर घोरम बलोच ने कहा कि बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट ने ओरनाच में कब्जा करने वाली पाकिस्तान की सेना के काफिले पर हमले में छह कर्मियों की हत्या की जिम्मेदारी लेता है।

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उल्लेखनीय है कि बीएलएफ बलोचिस्तान की आजादी के लिए लंबे समय से संघर्ष कर है। बलोचिस्तान में आजादी का आंदोलन 1947 में भारत के विभाजन के बाद शुरू हुआ। कलात रियासत को पाकिस्तान में जबरन मिलाने के बाद तब से बलोच राष्ट्रवादी अपने क्षेत्र की पूर्ण स्वतंत्रता और अपने प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। 2004 से बीएलएफ, बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) और बलोच रिपब्लिकन आर्मी (बीआरए) जैसे विद्रोही समूह सक्रिय हैं।

ऐतिहासिक तथ्य है कि 1947 में कलात रियासत ने खुद को स्वतंत्र घोषित किया, मगर 1948 में पाकिस्तान की सेना ने इसे जबरन पाकिस्तान में मिला लिया। बलोच विद्रोही अपने क्षेत्र की स्वतंत्रता, राजनीतिक स्वायत्तता और प्राकृतिक संसाधनों (जैसे गैस और खनिज) पर नियंत्रण चाहते हैं। बलोच राष्ट्रवादियों का मानना है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) उनकी जमीन पर विदेशी कब्जे को मजबूत करता है। यह गलियारा नहीं बनना चाहिए।

आज बलोचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और सबसे कम विकसित प्रांत है। बलोच राष्ट्रवादियों और इस्लामाबाद के बीच संघर्ष जारी है। बलोच अपने शोषण और उपेक्षा के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं।

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